तरुणाई क्या फिर आनी है ..

सच्चा शरणम् तरुणाई क्या फिर आनी है !चलो, आओ !झूम गाओप्रीति के सौरभ भरे स्वर गुनगुनाओहट गया है शिशिर का परिधानवसंत के उषाकाल मेंपुलकित अंग-अंग संयुतझूमती हैं टहनियाँ रसाल कीऔर नाचता है निर्झरगिरि शिखरों से उतर-उतरकहता है - तरुणाई क्या फिर आनी है !झाग भरी बरसाती... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu

कविता

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[07 Jan 2010 08:14 AM]

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