कबीर के श्लोक -४
कबीर सब ते हम बुरे,हम तजि भले सभु कोए॥जिनि ऐसा करि बूझिआ,मीतु हमारा सोए॥७॥इस श्लोक में कबीर जी कहते है कि सब से बुरे हम ही होते है,हमे छोड़ कर बाकि सभी तो भले ही हैं।जब यह बात समझ मे आती है,उस समय वह सभी लोग अपने लगने लगते है जो इस प्रकार जान जाते...
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परमजीत बाली
अध्यात्मिक
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[07 Jan 2010 03:44 AM]



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