कुछ ख्याल

zakhm पति होने का धर्मउसने कुछ ऐसे निभायाइक हँसते , मुस्कुरातेज़िन्दगी की उमंगों सेभरपूर गुल कोनिर्जीव, बेजान बनायातूतेरा ख्यालऔरतेरी ज़िन्दगीसब तेराइसमें'मैं ' कहाँ हूँ ?जो दिखाई ना देवो अश्कजो सुनाई ना देवो शब्दऔर दोनों का दर्दकभी झांकनाउनके आईने मेंवहां... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[07 Jan 2010 01:03 AM]

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