स्वयं ही रणचंडी बनना होगा
स्वयं ही रणचंडी बनना होगा स्त्री के मन को इस देश में, कोई न समझ पाया है? कितना गहरा दर्द,तूफ़ान समेटे है, अपने गर्भ में,मस्तिष्क में, उसकी उर्वर जमीन में, बीज बोते समय तुमने न उसे खाद दी , न जल से सींचा, अपने रक्त की हर बूँद से, उसने उसे पोसा, असंख्य...
[पूरी पोस्ट]
ramadwivedi
सृजन के प्रिय क्षणस्वयं ही रणचंडी बनना होगा
18
0
0
0
1
[06 Jan 2010 21:43 PM]



Shuffle








