चुनावी मेला

मेरी आवाज़ सुनो...! भारतीय लोकतंत्र के मैदान में चुनावी मेला अपने शवाब पर है। सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों के नेता अपने-अपने चुनावी ठेले को अपने- अपने निर्वाचन क्षेत्रों में घूम रहे हैं। चुनावी ठेला नारों और वादों के झुनझुनों से लदा हुआ है। चुनावी ठेलों से सभी... [पूरी पोस्ट]
writer प्रबल प्रताप सिंह्

चुनावी मेला

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[07 May 2009 06:00 AM]

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