सरफ़रोशी की समां दिल में जला लो यारों

मेरी आवाज़ सुनो...! जब देश आज़ाद हुआ तो आम आदमी का हाथ ही एकमात्र पार्टी थी। पचास साल से अधिक समय तक देश पर इसी पार्टी ने शासन किया। सत्ता सुख के मद में लोकतंत्र की दुर्गति इस पार्टी ने जितना किया शायद दुनिया के किसी और लोकतान्त्रिक देश के साथ ऐसा नहीं हुआ। देश की आबादी के... [पूरी पोस्ट]
writer प्रबल प्रताप सिंह्
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[14 May 2009 05:35 AM]

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