ग़ज़ल
मदारी डमरू बजाएगा,बन्दर जनता को खूब झुमाएगा।मदारी भावनाओं को भड़काएगा,बन्दर जनता को आपस में लड़ाएगा।चुनावों में पैतरेबाजी खूब करते हैं,नेता हमारे मदारी का रूप धरते हैं।वादों में जख्मों को भरपूर भरते हैं,इनके चौखट पे सर मजबूर रखते हैं।सबकी ख़बर रखते हैं ये...
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प्रबल प्रताप सिंह्
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[15 May 2009 04:51 AM]



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