इस बार की सर्दी...
१कितनी ही सर्दियाँ आई गयीं,किन्तु इस बार की सर्दी का,अंदाज कुछ निराला है ,कोहेरे से ढका है पूरा दिन ,और रात को पड़ता पाला है ।सूरज की क्या बिसात जो,लोगों को दर्शन दे जाये,कैसे झांके चाँद बेचारा ?कुहासे ने घूंघट जो डाला,कहीं मफलर, कहीं स्वेटर,कहीं टोपी ,...
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Navnit Nirav
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[06 Jan 2010 11:17 AM]



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