सरस्वती वंदना : २ -संजीव 'सलिल'
सरस्वती वंदना : २ संजीव 'सलिल'*हे हंसवाहिनी!, ज्ञानदायिनी!!अम्ब विमल मति दे...*जग सिरमौर बने माँ भारत.सुख-सौभाग्य करे नित स्वागत.नव बल-विक्रम दे...*साहस-शील ह्रदय में भर दे.जीवन त्याग-तपोमय कर दे.स्वाभिमान भर दे...*लव-कुश, ध्रुव-प्रह्लाद हम बनें.मानवता...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[06 Jan 2010 11:19 AM]



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