श्रीगणेश
श्रीगणेश श्रीगणेश निर्माण का, अच्छा मुहरत देख ।धन मांगे पण्डित सभी, मूषक देखे रेख ।। देखे मूषक रेख , न मांगे एकहुं पैसा ।भवन रेख तत्काल ,भवन हो महलों जैसा ।।कह `वाणी´ कविराज, होय नही बांका केश ।जो जग बांका होय, मनाय प्रभु श्रीगणेश ।। शब्दार्थ : श्रीगणेश...
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[06 Jan 2010 10:55 AM]



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