नये साल में "लोहे के घर" में यात्रा करते हुए एक कविता

कवि कोकास कई दिनों के बाद यात्रा से लौटा हूँ ..मुम्बई गया था ,बीमार चाचा जी से मिलने । व्यस्तता और भागदौड़ कुछ ऐसी रही कि ब्लॉगर मित्रों से और कवि कथाकार मित्रों से मुलाकात ही नहीं कर पाया । जाते समय सोचता रहा कि सबसे मिलूंगा लेकिन यह सम्भव नहीं हुआ । यहाँ तक कि... [पूरी पोस्ट]
writer शरद कोकास

बोतल

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[06 Jan 2010 10:17 AM]

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