कभी लगती हकीक़त सी
कभी तो ख्वाब सा लगता कभी लगती हकीक़त सी; मिली है ज़िन्दगी इक क़र्ज़ में डूबी वसीयत सी. उसूलों के लिए जो जान देते थे कभी अपनी, वे खुद करने लगे हैं अब उसूलों की तिजारत सी. कभी जिसके इशारों पर हवा का रुख बदलता था ,हवा करने लगी है अब स्वयं उनसे बगावत सी. रखा...
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chandrabhan bhardwaj
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[06 Jan 2010 08:55 AM]



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