एक ज़मीन में दो शायर
एक ज़मीन में दो शायरों की, बराबर के मेयार की ग़ज़लें बड़ी मुशकिल से मिलती हैं। ये दोनों ग़ज़लें एक ही ज़मीन में हैं लेकिन दोनों बेमिसाल और लाजवाब हैं। पढ़िए, सुनिए और लुत्फ़ लीजिए-पहली ग़ज़ल जनाब- अहमद नदीम कासमी की -ग़ज़लकौन कहता है कि मौत आयी तो मर...
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सतपाल
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[06 Jan 2010 08:15 AM]



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