रंग मंच सा लागे मुझको
" रंग मंच सा लागे मुझको "रंग मंच सा लागे मुझकोदुनियाँ को मैंने न जानी ।जीवन के इस रंग मंच परकलाकार अद्भुत देखी हैनिर्देशन का पता नहीं हैअभिनय करे मन मानी दुनिया को मैं ने न जानी ।दो अन्जाने मिल जाते हैंमिल अभिनय भी कर जाते हैअभिनय करना एक कला हैयह भी तो...
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Kusum Thakur
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[06 Jan 2010 06:31 AM]



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