समीर लाल जी का काव्य संग्रह बिखरे मोती, उड़नतश्तरी का दूसरा रूप जो गहन और गम्भीर है । बिखरे मोती प्रकाशित अब विमोचन की प्रतीक्षा कीजिये ।
समीर जी की पुस्तक पे काम करना मुश्किल इसलिये था कि वे भी बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं । वे व्यंग्य भी लिखते हैं और हास्य भी, गीत भी लिखते हैं और ग़ज़ल भी, मुक्तक भी लिखते हैं और सोनेट भी । तिस पर ये भी कि कोई भी...
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पंकज सुबीर
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[02 Apr 2009 04:20 AM]



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