नुक्कड़

Arshad ke man se........ सभ्यताएं बदलते हुए कर्मवत जाने किस शुन्य में ले जाएगी प्रश्न काँटों का ताज बन प्रतेक चिन्तक के मस्तक पर चुभती चली जाएगीप्रतेक दिन सजता नुक्कड़ उजाड़ होता जायेगा प्रतेक दिन उजड़े नुक्कड़ को काल पुनः सजाएगी.नुक्कड़ लोगों की भीड़ संस्कृतियों का जमावमन... [पूरी पोस्ट]
writer Arshad Ali
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[06 Jan 2010 03:36 AM]

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