“कहीं धूप, कहीं छाया” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

शब्दों का दंगल इस बार की सरदी से जन-जीवन ठप्प नैनीताल में खिली हुई गुनगुनी धूप मगर मैदानी-क्षेत्रों में कुहरे की चादर गहराई। हे प्रभो! अजब है माया, कहीं धूप, कहीं छाया।। ठण्ड की मार के कारण उत्तराखण्ड केकक्षा-एक से कक्षा नौ तक के छात्र-छात्राओं के विद्यालय 15 जनवरी तक... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

मौसम की मार

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[06 Jan 2010 03:08 AM]

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