त्रिवेणी 2

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... बोने से बबूल आम नहीं मिलते कभी, खार से तो बस हाथ ही छिला करते हैं.सुना है पडोसी देश आतंकवाद का शिकार है.*************************घूमता है कुम्हार का चाक जबकितना हुनर बिखेर देता है जग में.ये बता ए वक़्त तेरा कुम्हार कहाँ बस्ता... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

triveni

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[06 Jan 2010 00:27 AM]

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