Jayant Chaudhary
लिखने कुछ और बैठा था... लिख कुछ और रहा हूँ।समय का ही फेर है... जो मन में था उसे लिखने में देर हो गयी और अवसर चूक गया॥समय समय की ही बात है।यह समय होता ही है ऐसा... निर्दयी,कभी किसी के लिए ठहरता ही नहीं,जब कभी चाहो तो गुजरता ही नहीं॥यह समय होता ही है...
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Jayant Chaudhary
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[06 Jan 2010 00:25 AM]



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