ना भुला सका
लीजिये एक और रचना पुरानी डायरी से.ना भुला सका मैंने तेरी राह ना देखी, इंतज़ार भी नहीं कियासच कहता हूँ ,दिल से, मैंनेतुझको प्यार भी नहीं कियाफिर भी जाने क्या कारण है तुझको मैं ना भुला सकातुझसे कभी ना मिलना चाहतेरा रूप ना कभी सराहावफ़ा की कोई कसम ना...
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योगेश स्वप्न
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[05 Jan 2010 22:56 PM]



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