वह एक नदी थी

Gyanvani वह एक नदी थी .... जब तुमसे मिली थी बहती थी अपनी रौ मेंकल- कल करती.... कूदती- फांदती प्यार की फुहारों से भिगोतीइठलाती थी.... इतराती थीचंचल शोख बिजली- सी बल खाती थीपर .... तब तुम्हे कहाँ भाती थी ......!!राह में उसके कंकड़- पत्थर भी थे कुछ सूखे हुए फूलकुछ... [पूरी पोस्ट]
writer वाणी गीत

कविता

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[05 Jan 2010 22:01 PM]

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