वह एक नदी थी
वह एक नदी थी .... जब तुमसे मिली थी बहती थी अपनी रौ मेंकल- कल करती.... कूदती- फांदती प्यार की फुहारों से भिगोतीइठलाती थी.... इतराती थीचंचल शोख बिजली- सी बल खाती थीपर .... तब तुम्हे कहाँ भाती थी ......!!राह में उसके कंकड़- पत्थर भी थे कुछ सूखे हुए फूलकुछ...
[पूरी पोस्ट]
वाणी गीत
कविता
40
1
0
1
25
[05 Jan 2010 22:01 PM]



Shuffle








