भाषा नयन की लिख रहा हूँ
चाहता हूँ मैं लिखूँ कुछ प्रीत के नूतन तरानेभाव में डूबे हुए कुछ बिम्ब ले लेकर सुहानेकिन्तु वर्णन न्यायसंगत हो नहीं पाता तनिक भीशब्द जितने पास मेरे, हो चुके हैं सब पुरानेइसलिये अब शब्द बिन भाषा नयन की लिख रहा हूँआईना हूँ आपको अपने सरीखा दिख...
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राकेश खंडेलवाल
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[05 Jan 2010 21:17 PM]



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