कतरा कतरा मैं बह जाऊंगा
मकाँ इक पुराना हूँ मैं, तेरी गर्म सांसों से ढह जाऊंगान रो मेरे काँधों से लगकर, कतरा कतरा मैं बह जाऊंगा आशिक़ बनकर जिया हूँ मैं, आशिक़ बनकर मर जाऊँगा,छिपाया ताउम्र नाम जो आखिरी हिचकीं में कह जाऊंगारात-रात जागा हूँ मैं, चुभते हुए...
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Sudhir (सुधीर)
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[05 Jan 2010 14:00 PM]



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