चौदहवीं का चांद हो या आफ़ताब हो...

गुनगुनाती धूप.. 'चौदहवीं का चांद हो या आफ़ताब हो,जो भी हो तुम ख़ुदा की क़सम लाज़वाब हो 'रवि द्वारा संगीतबद्ध'फिल्म -'चौदहवीं का चांद हो'लिखा था शकील बदायुंनी ने .मेरी पसंद में अभी तक मैने आप को राजा पाहवा,डॉकटर विकास अग्रवाल और सरिता जी की गाये गीत आप को सुनवाए.आज मैं... [पूरी पोस्ट]
writer अल्पना वर्मा
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[05 Jan 2010 10:05 AM]

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