किस्से और कहानी भी

Jogeshwar Garg किस्से और कहानी भी दिल में और जुबानी भी गया बुढापा सुना कभी लौटी कभी जवानी भी कठमुल्ले समझेंगे क्या कबीरा तेरी वाणी भी बढ़ कर सौ सैलाबों से आँखों वाला पानी भी लगे हकीक़त जैसी क्यों दुनिया आनी जानी भी कुछ मेरा दीवानापन कुछ उनकी मनमानी भी "जोगेश्वर" को छोडो... [पूरी पोस्ट]
writer jogeshwar garg

ghazal

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[05 Jan 2010 07:24 AM]

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