अल्लामा इकबाल : बच्चों के लिए (५) : शहद की मक्खी

शैशव इस फूल पे बैठी , कभी उस फूल पे बैठी बतलाओ तो, क्या ढूँढ़ती है शहद की मक्खी ? क्यों आती है , क्या काम है गुलजार में उसका ? ये बात जो समझाओ तो समझें तुम्हे दाना चहकारते फिरते हैं जो गुलशन में परिन्दे क्या शहद की मक्खी की मुलाकात है उनसे ? आशिक है ये कुमरी... [पूरी पोस्ट]
writer अफ़लातून

hindi poemsअल्लामा इकबालhindiallama iqbalnursery rhymes , kids' poetry

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[05 Jan 2010 01:20 AM]

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