डाकिया बीमार है
मोबाइल क्रान्ति के इस युग में रामकुमार कृषक जी के ये कविता बहुत से लोगों को चकित कर सकती है। मगर सिर्फ एक दशक पहले तक इस देश में डाकिये के संदर्भ वाले य़े नज़ारे हुआ करते थे। यकीनन आज भी होंगे, मगर नई पीढी यह मान चुकी है कि देश के कोने कोने में सेल फोन बज...
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डाकिया बाबू
डाकिया
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[02 Jan 2010 08:42 AM]



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