कौटिल्य दर्शन-अनापशनाप बकने से जमाना विपरीत हो जाता है (bakbas karna theek nahin-hindu dharama sandesh)
अकस्मादेव यः कोपादभीक्ष्णं बहु भाषते।तसमाबुद्धिजते लोकः सस््फुलिंगदिवानलात्।।हिंदी में भावार्थ-जो व्यक्ति अचानक ही क्रोध में अनापशनाप बकने लगता है वह संसार को वैसे ही अपने विपरीत बना लेता है जैसे आग से निकलने वाली चिंगारी से लोग उत्तेजित होकर उससे दूर हो...
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दीपक भारतदीप
आध्यात्म
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[04 Jan 2010 23:33 PM]



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