बहुत घना कोहरा, कड़ी ठंड और उसके बीच चलता हुआ एक मुशायरा । तरही मुशायरे में आज सुनिये दो शायरों की ग़ज़लें, गिरीश पंकज और प्रकाश पाखी की ग़ज़लें ।

सुबीर संवाद सेवा म प्र देखते ही देखते नया साल आ भी गया है । 2010, देखने में ही सुंदर अंक लग रहा है । अब देखते है कि ये बीस दस क्‍या गुल खिलाता है । आज कोहरे का जो आलम देखा वो अनोखा था । इतना कि वास्‍तव में हाथ को हाथ ही नहीं सूझ रहा था । हर तरफ धुंध और धुंआ । ठंड इतनी कि मोटर... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज सुबीर
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[04 Jan 2010 22:17 PM]

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