मुरली तेरा मुरलीधर 41

अखिलं मधुरम् तुम गुरु स्वयं शिष्य मन तेरा प्रथम सुधारो मन मधुकरजग सुधार कामना मत्त मत जग में करो गमन निर्झर ।करता विरत कृष्ण-चिन्तन से जगत राग द्वेषादि ग्रसितटेर रहा है मनसंयमिनी मुरली तेरा मुरलीधर ॥ २२१॥स्वयं कृपालु बनो मन पर दो उसे प्रबोधन स्वर मधुकरप्यारे अब बनना... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu

मुरली तेरा मुरलीधर

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[04 Jan 2010 21:03 PM]

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