बिन बुलायी, एक अपूर्ण कविता
आज व्याधिग्रस्त माया श्रीवास्तव धुर 5 बजे अवतरित हुईं, टालने का प्रश्न नहीं.. पर थोड़ी व्यग्रता थी क्योंकि यह आज के परामर्श समय की अंतिम बेला थी, हिस्ट्री लेने के दौरान मेरे मुँह से ‘ परिवेश ‘ शब्द का उल्लेख हुआ । बस, उनके पतिदेव महोदय...
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डा. अमर कुमार
सुन मेरे सँगी रे
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[02 Jan 2010 11:06 AM]



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