कभी कभी मेरे दिल में..

कुछ तो है... जो कि, ….  यह ख़्याल आता है कि, ब्लागिंग में मुआ ब्लागर आख़िर करता क्या है …  क्या केवल यही तो नहीं,   कि   " रमैया तोर दुल्हिन लूटै बजार " ? शायद ऎसा नहीं ही होगा.. काहे कि सदियन पाछै कबीरौ पलटि के ठोकिं गये रहें,... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार

सुन मेरे सँगी रे

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[02 Jan 2010 11:04 AM]

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