खोखर बड़ो खुराकी, खा गयो अप्पा जैसो डाकी
ये मदमत्त मरहठे अपना स्वरूप भूलकर राजपूताने के क्षत्रियों को दु:ख न देते तो राजपूताने की एकाएकी वर्तमान दशा इतनी खराब न हुई होती। – भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्र ई.1882 मुगल सत्ता के कमजोर हो जाने के बाद केंद्रीय स्तर पर राजनीतिक शक्ति की अनुपस्थिति की...
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Mohanlal Gupta
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[23 Dec 2009 00:42 AM]



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