आधी जली बीड़ी ...
खुद में ठिठुरती सर्दी फ़िर से आ धमकी है फेंफडे जैसे जम जाए साँसे दुबकती नज़र आती हैं नसों का उबाल सिकुड़ने पर आमादा है आधी जली बीड़ीफ़िर सुलगाता है धुएं कि गर्मीहै रात कि तपिश खातिर दीमक लगी दिवार पर पीठ टिकातेदांत कटकटाते यही सोंचता है क्या आज कि रात उसे...
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"अर्श"
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[04 Jan 2010 12:25 PM]



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