त्रिवेणी

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... चांदनी है जब तक ज़मीन पर कोई चाँद को देखता तक नहीं,जो आजाती है अमावस बीच में, चाँद की कमी खलने लगती है.रिश्तों ने भी आज कल कुछ यूँही घटना बढ़ना सीख लिया है.--नीरज ... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

triveni

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[04 Jan 2010 11:45 AM]

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