घर से भागी हुई एक लड़की का ख़त
प्रिय मित्रों, श्री योगेश छिब्बर ने एक कहानी लिखी है जो कुछ यों शुरु होती है - पापा: आपके पिता होने में न सुंदरता है, न कोमलता, न कोई मीठा गीत। आपकी बेटी होना अपमान है, अपराध है, पाप है; आप मेरे स्त्री होने की सुंदरता पर हावी नहीं हो सकते। इसीलिए मैं...
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सुशान्त सिंहल
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[04 Jan 2010 07:11 AM]



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