डेढ़ हजार बराती तो भूखे ही थे!

Rag Darbari पिंगलक के मंत्री करटक और उसकी धर्मपत्नी करटकी के जोर डालने पर वीतरागी लघुपतनक चूहे ने इस शर्त पर विवाह करना स्वीकार किया कि विवाह में कोई तड़क भड़क नहीं हो।करटकी बोली–‘भला यह भी कोई बात हुई! विवाह जीवन में एक बार होता है, सो पूरे धूमधाम से होगा।’इस पर... [पूरी पोस्ट]
writer Mohanlal Gupta

satire

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[04 Jan 2010 03:14 AM]

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