ब्लॉगर हलकान 'विद्रोही' का राष्ट्रकवि 'दिनकर' के नाम पत्र
अब तक यह जग-जाहिर हो गया है कि मेरी ब्लागिंग में मौलिक कुछ भी नहीं. जो कुछ भी मौलिकता है वह दूसरों की है. इंटरव्यू, डायरी, न्यूजपेपर की रपट वगैरह-वगैरह, मैं कहीं से उड़ाकर, कहीं से चोरी कर लाता हूँ और छाप देता हूँ. आप लोगों में से कुछ लोगों को भी आदत पड़...
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Shiv Kumar Mishra
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[04 Jan 2010 01:45 AM]



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