एहसास (कुछ यूँ ही )

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** सर्दी का ...घना कोहरा..उसमें..डूबा हुआ मन..एक अनदेखी सीचादर में लिपटा हुआऔर तेरी याद उस मेंआहिस्ता से ,धीरे सेउस कोहरे को चीरतीयूँ मन पर छा रही हैजैसे कोई कंवलखिलने लगा है धीरे धीरेऔर आँखों में एक चाँद...मुस्कराने लगा है ...रंजना (रंजू )भाटिया"सन्डे... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]

कुछ यूँ ही

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[04 Jan 2010 01:02 AM]

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