आत्मघाती लो फ्लोर

मन उवाच..... सुबह-सुबह सूखे नल से जूझकर रात के ठंडे पानी से नहाने का नाच नाचते हुए बस अड्डे पहुंचा हूं। ठंड पर जलवायु परिवर्तन का खासा असर है लेकिन जल निगम की मेहरबानी से मुझे कम सर्दी में ज़्यादा सर्दी का अहसास हो रहा है। कपड़ों के नीचे बदन के रोएं कथक कर रहे हैं।... [पूरी पोस्ट]
writer मधुकर राजपूत
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[03 Jan 2010 23:32 PM]

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