ग़ज़ल - अगर मैं झूठ बोलूँ तो मेरा किरदार मरता है

kavideepakgupta अगर मैं झूठ बोलूँ तो मेरा किरदार मरता हैजो बोलूँ सच तो फिर भूखा मेरा परिवार मरता हैशिकायत सबको है मुझसे कि मैं कम कहता हूँ, लेकिनरहूँ मसरूफ कहने में तो कारोबार मरता हैमुझे लगता है मेरी ज़िन्दगी का अंत यूं होगाबिना उपचार के जैसे कोई बीमार मरता हैअना जिंदा... [पूरी पोस्ट]
writer kavideepakgupta
views
19
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
6
[03 Jan 2010 23:42 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix