त्रासदी पुरानी डायरी के पन्नों की,चंद ब्लौगरी-संकल्प और एक कविताई शंका

पाल ले इक रोग नादां जिंदगी के वास्ते... मेरी डायरी के पन्ने पीले क्यों नहीं होते...सोचता हूँ मैं अक्सर। कब से लिख रहा हूँ...कब से ही तो। एक पूरा बीता हुआ बचपन सिमटा हुआ है इसमें, एक पूरी जवानी भी जो अपने बचपने से कभी उबर ही नहीं पायी। लेकिन फिर भी ये पन्ने सारे-के-सारे वैसे ही हैं- श्वेत...धवल... [पूरी पोस्ट]
writer गौतम राजरिशी

एक ब्लौगर की डायरी से...

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[03 Jan 2010 20:00 PM]

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