तीन मुक्तक

गीत सुनहरे न्याय बिकता है तराजू तोल ले,हृदय की संवेदना का मोल ले,हर तरफ है रुपया आज बोलता,बेचने अपनी पिटारी खोल ले. बचे हुए भी चार गांधी चुक गये,सत्य अहिंसा पुस्तकों में छप गये,हिंदुस्तां की अस्मिता को बेचनेसौदागर ही हर तरफ बस रह गये . अर्चना से देवता अब डर रहे,सुन... [पूरी पोस्ट]
writer Kavi Kulwant

तीन मुक्तक

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[03 Jan 2010 13:09 PM]

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