कोई पत्थर तो नहीं हूँ , कि ख़ुदा हो जाऊँ
कैसे मुमकिन है, ख़मोशी से फ़ना हो जाऊँकोई पत्थर तो नहीं हूँ, कि ख़ुदा हो जाऊँफ़ना = तबाह फ़ैसले सारे उसी के हैं, मिरे बाबत भी मैं तो औरत हूँ, कि राज़ी-ओ-रज़ा हो जाऊँधूप में साया, सफ़र में हूँ कबा फूलों की मैं अमावस में, सितारों की जिया हो जाऊँकबा = लिबास...
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श्रद्धा जैन
Shrddha Jain
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[03 Jan 2010 10:32 AM]



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