सुना है उस चौखट पर अब शाम रहा करती है ...

राजू बिन्दास! मुझे पता नही क्यों एक गाना याद आ रहा है- चुन-चुन करती आई चिडिय़ा, दाल का दाना लाई चिडिय़ा, मोर भी आया कौआ भी आया...ये गाना तो बहुत पुराना है. लेकिन ऐसा ही गाना तो आजकल भी गाया जा रहा है. हां, सुर और स्वर थोड़ा बदले हुए हैं. आजकल चुन-चुन करनेवाली चिडिय़ा से... [पूरी पोस्ट]
writer rajiv

छोड़ आए हम वो गलियां

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[03 Jan 2010 07:19 AM]

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