मुझे मंज़िलों का पता नहीं मेरा कारवां कहीं और है

Awaz Do Hum Ko मेरी हसरतें मेरे साथ हैं मेरी आरज़ू कहीं और हैमुझे रास्ता मेरा मिल गया मेरी मंज़िलें कहीं और हैंयहां कोई दर्द ना ग़म कोई नई आरज़ू नया जोश हैमेरी ज़िंदगी मेरे साथ चल मेरी धड़कनें कहीं और हैंमेरी मान मेरे यार तू मुझे रोक ना बीच मोड़ परमुझे मंज़िलों का पता... [पूरी पोस्ट]
writer Razi Shahab
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[03 Jan 2010 06:34 AM]

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