ललित निबंध : नया कलेवर

अस्तित्व वह एक गहरी नींद से जगा था । नींद भी कोई ऐसी वैसी नहीं थी । बेहोशी या समाधि । दोनों या कोई नहीं । वह कब सोया था ? कितने अंतराल के बाद जागा ?, उसे नहीं पता । समय काल, जिसकी गोद में यह सारा आडम्बर का अस्तित्व फलता फूलता , खेलता कूदता है, स्वयं में... [पूरी पोस्ट]
writer सुरेश पण्डा

हिंदी

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[03 Jan 2010 02:15 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix