तुम्हें तो नीम भी नही मिलता होगा!

मौन के खाली घर मे-                                       ओम आर्य रात जब दो बजा देती है और लाख कोशिशों के बावजूद हर्फ़ उतार नहीं पाते उसकी आगोश कों कागज़ पे मैं कंही भी, जो भी मिल जाएउसमें समां जाने के लिएनिकल पड़ता हूँ सुनसान सड़क पर।मैं लिपट जाता हूँ नीम सेऔर देर तक लिपटा रहता हूंसोंचते रहता हूँ देर तकनीम की लम्बी उम्र... [पूरी पोस्ट]
writer ओम आर्य
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[03 Jan 2010 02:11 AM]

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