गीतिका: तितलियाँ --संजीव 'सलिल'
गीतिका तितलियाँ संजीव 'सलिल' *यादों की बारात तितलियाँ.कुदरत की सौगात तितलियाँ..बिरले जिनके कद्रदान हैं.दर्द भरे नग्मात तितलियाँ..नाच रहीं हैं ये बिटियों सीशोख-जवां ज़ज्बात तितलियाँ..बद से बदतर होते जाते.जो, हैं वे हालात तितलियाँ..कली-कली का रस लेती...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
muktika
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[02 Jan 2010 23:45 PM]



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