बोहनी

पंजाबी लघुकथा रणजीत कोमलगर्मी पूरे जोरों पर थी। गाँव को जाती सड़क पर सिर्फ उसी की साइकिलों की मरम्मत की दुकान थी। परछाइयाँ ढलने पर थीं, पर अभी बोहनी ही नहीं की थी। उबासियां लेता वह ग्राहक का इंतजार कर रहा था। कभी वह बक्से में पड़े सामान की तरफ देखता और कभी सड़क की... [पूरी पोस्ट]
writer दीपशिखा

रणजीत कोमल

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[02 Jan 2010 20:57 PM]

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